गुरुवार, 8 अक्टूबर 2009

DIVINE MESSAGE - 08.10.09

IF THERE IS HYPOCRISY, THINK OF
FRANKNESS AND ITS INVALUABLE ADVANTAGES.

छल कपट की भावना प्रबल होने पर
निष्कपटता और उसके मूल्यवाण लाभों की सोचो।


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बुधवार, 7 अक्टूबर 2009

DIVINE MESSAGE - 07.10.09

IF THERE IS PRIDE, THINK OF HUMILITY.
IF THERE IS JEALOUSY, THINK OF
NOBILITY AND MAGNANIMITY.

यदि तुम्हें अहंकार है, तो विनम्रता का विचार करो।
यदि द्वेष की भावना प्रबल है तो भद्रता और
उदारता के विषय में विचार करो।

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मंगलवार, 6 अक्टूबर 2009

DIVINE MESSAGE - 06.10.09

IF THERE IS MISERLINESS, THINK OF
GENEROSITY AND GENEROUS PERSONS.

यदि कंजूसी के विचार प्रबल हैं तो,
दान और दानी व्यक्तियों के संबंध में सोचो।

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सोमवार, 5 अक्टूबर 2009

DIVINE MESSAGE - 05.10.09

IF THERE IS DISHONESTY,
THINK OF HONESTY AND INTEGRITY

यदि बेईमानी की भावना प्रबल है तो,
ईमानदारी और पवित्रता के संबध में सोचो


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शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2009

DIVINE MESSAGE - 02.10.09

बंजारानामा - 'नज़ीर' अकबराबादी
क्यों जी पर बोझ उठाता है इन गौनों भारी-भारी के
जब मौत का डेरा आन पड़ा फिर दूने हैं ब्योपारी के
क्या साज़ जड़ाऊ, ज़र ज़ेवर क्या गोटे थान किनारी के
क्या घोड़े ज़ीन सुनहरी के, क्या हाथी लाल अंबारी के
सब ठाठ पड़ा रह जावेगा जब लाद चलेगा बंजारा

मग़रूर न हो तलवारों पर मत भूल भरोसे ढालों के
सब पत्ता तोड़ के भागेंगे मुंह देख अजल के भालों के
क्या डिब्बे मोती हीरों के क्याढेर ख़जाने मालों के
क्या बुक़चे ताश, मुशज्जर के क्या तख़ते शाल दुशालों के
सब ठाठ पड़ा रह जावेगा जब लाद चलेगा बंजारा
मगरुर-घमण्डी, बुक़चे ताश-छपा हुआ कपड़ा, मुशज्जर-पेड़ों के डिजाइन का कपड़ा

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गुरुवार, 1 अक्टूबर 2009

DIVINE MESSAGE - 01.10.09

IF THERE IS HARSHNESS OF HEART,
THINK OF MERCY

यदि मन कठोर हो तो,
दया की भावना का विचार करो।


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बुधवार, 30 सितंबर 2009

DIVINE MESSAGE - 30.09.09

IF THERE IS THE FEELING OF ANGER,
THINK OF LOVE.

यदि क्रोध की भावना प्रबल है तो,
प्रेम के विषय में सोचो।


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मंगलवार, 29 सितंबर 2009

DIVINE MESSAGE - 29.09.09

YOU CAN CHANGE YOUR VICIOUS NATURE BY
CULTIVATING HEALTHY VIRTUOUS QUALITIES.
POSITIVE ALWAYS OVERPOWERS THE NEGATIVE.
THIS IS AN INFALLIBLE LAW OF NATURE.
(Swami Sivananda)
तुम अपने पापी स्वभाव को अच्छे गुण सीख कर बदल
सकते हो। सामान्य विचार सदैव निषेधात्मक विचारों
पर विजय पाते हैं, यह प्रकृति का सुन्दर नियम है।

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सोमवार, 28 सितंबर 2009

DIVINE MESSAGE - 28.09.09

YOU SHOULD BE EVER WATCHING THE
MENTAL STATES THROUGH CAREFUL AND
VIGILANT INTROSPECTION, AND SHOULD NOT
ALLOW ANY NEGATIVE AND UNDESIRABLE
BHAVA TO MANIFEST. YOU MUST
IMMEDIATELY CHANGE THE EVIL BHAVA
BY THINKING OF THE OPPOSITE BHAVA.
(Swami Sivananda)
सावधानी और अन्तरावलोकन द्वारा सदा मानसिक
परिस्थितियों का ध्यान रखना चाहिए। मन में किसी
प्रकार का निषेधात्मक या अनिश्चित भाव प्रकट नहीं
होने देना चाहिए। कलुषित भावना को शुद्ध भावना
में बदल देना चाहिए।

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शुक्रवार, 25 सितंबर 2009

बंजारानामा - 'नज़ीर' अकबराबादी

ये धूम-धड़क्का साथ लिये क्यों फिरता है जंगल-जंगल
इक तिनका साथ न जावेगा मौक़ूफ़ हुआ जब अन्न और जल
घर-बार अटारी चौपारी क्या ख़ासा, नैनसुख और मलमल
क्या चिलमन, परदे, फ़र्श नए क्या लाल पलंग और रंग-महल

सब ठाठ पड़ा रह जावेगा जब लाद चलेगा बंजारा

कुछ काम न आवेगा तेरे ये लालो-ज़मर्रुद सीमो-ज़र
जब पूंजी बाट में बिखरेगी हर आन बनेगी जान ऊपर
नौबत, नक़्क़ारे, बान, निशां, दौलत, हशमत, फ़ौजें, लशकर
क्या मसनद, तकिया, मुल्क मकां, क्या चौकी, कुर्सी, तख़्त, छतर
सब ठाठ पड़ा रह जावेगा जब लाद चलेगा बंजारा

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गुरुवार, 24 सितंबर 2009

DIVINE MESSAGE - 24.09.09

UNWAVERING FIRMNESS AND PATIENCE
ARE NEEDED TO TIDE OVER CRITICAL
SITUATIONS AND GAIN SUCCESS. DO NOT
PERTURBED ON SMALL HAPPENINGS
AND NEVER LOSE PATIENCE.
(Swami Sivananda)
विकट परिस्थितियों पर विजय पाने और सफल बनने
के लिए दृढ़ लगन और अनहत धैर्य की आवश्यकता है।
साधारण सी घटना से विचलित नहीं होना चाहिए
और न ही धैर्य का त्याग करना चाहिए


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बुधवार, 23 सितंबर 2009

DIVINE MESSAGE - 23.09.09

An ethical man is more powerful than an intellectual man.
Ethical culture brings in various sorts of Sidhis or occult
powers. The nine Ridhis(accomplishments) roll under
the feet of an ethically developed man. They are ready
to serve him. Morality goes hand in hand with spirituality.
(Swami Sivananda)
सदाचारी मनुष्य बुद्धिवादी से कहीं अधिक शक्तिमान है। चरित्र
की उन्नति होने से नाना प्रकार की सिद्धियों और गुप्त शक्तियों
की प्राप्ति होती है। जो सदाचार में उन्नति करते हैं, नव-निधियां
उनके चरणों में लोटती है, वे सदा उनकी सेवा में प्रस्तुत रहती है
सच्चरित्रता आध्यात्मिकता के साथ-साथ चलती है।

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मंगलवार, 22 सितंबर 2009

DIVINE MESSAGE - 22.09.09

Right thinking, right endeavour, right action,
right living, etc., are all best calculated to
develop the moral side of a man. Sadachar
or right conduct aims at making a man moral,
so that he may be fit for the reception of Atma-
Jnan or the realisation of the Supreme Tattva.
(Swami Sivananda)
उचित विचार, उचित प्रयास, उचित कर्म, उचित
चर्चा आदि मनुष्य की नैतिक उन्नति के लिए
अत्यन्त विचार-वान सिद्धान्त है। सदाचार या
उचित आचरण से मनुष्य नैतिक बनता है और
आत्म-तत्त्व या ब्रह्मज्ञान पाने योग्य हो जाता है।


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सोमवार, 21 सितंबर 2009

DIVINE MESSAGE - 21.09.09

ASSERT YOUR DIVINE MAJESTY. RECOGNISE THE
BRAHMIC GLORY. REALISE YOUR FREEDOM AND
SATCHIDANANDA NATURE, YOUR CENTRE, IDEAL,
GOAL AND HERITAGE. REST IN THAT OCEAN OF
LIGHT, KNOWLEDGE, LOVE, PEACE, JOY AND BLISS
(Swami Sivananda)
अपने दैवी वैभवों को पहचानो। ब्रह्म की महिमा का अनुभव करो।
अपनी स्वतन्त्रता, अपना सच्चिदानन्द स्वभाव, अपना महाकेन्द्र,
आदर्श और लक्ष्य कभी न भूलो। उस प्रकाश, ज्ञान, प्रेम, शान्ति,
सुख और आनन्द के समुंद्र में सदा आनन्दमग्न रहो।

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शुक्रवार, 18 सितंबर 2009

बंजारानामा - 'नज़ीर' अकबराबादी

जब चलते-चलते रस्ते में ये गौन तेरी रह जावेगी
इक बधिया तेरी मिट्टी पर फिर घास न चरने पावेगी
ये खेप जो तूने लादी है सब हिस्सों में बंट जावेगी
धी, पूत, जमाई, बेटा क्या, बंजारिन पास न आवेगी
सब ठाठ पड़ा रह जावेगा जब लाद चलेगा बंजारा

ये खेप भरे जो जाता है, ये खेप मियां मत गिन अपनी
अब कोई घड़ी पल साअ़त में ये खेप बदन की है कफ़नी
क्या थाल कटोरी चांदी की क्या पीतल की डिबिया ढकनी
क्या बरतन सोने चांदी के क्या मिट्टी की हंडिया चपनी
सब ठाठ पड़ा रह जावेगा जब लाद चलेगा बंजारा

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गुरुवार, 17 सितंबर 2009

DIVINE MESSAGE - 17.09.09

YOU MUST BECOME AN EXPERT IN
DECIDING A LINE OF ACTION, WHEN
YOU ARE IN A DILEMMA, THAT CAN
BRING SURE SUCCESS. YOU MUST
KEEP THE INSTRUMENT(BUDHHI)
VERY VERY SUBTLE AND SHARP.
(Swami Sivananda)
जब कभी तुम उभय-संभव तर्क में पड़ जाओ,

तो तुम्हें मार्ग निश्चित करने के लिए निपुण
बनना चाहिए, जिससे तुम्हे सीधी सफलता
प्राप्त हो सके। इसके लिए बुद्धि अति सूक्षम
और कुशाग्र रहनी चाहिए।

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बुधवार, 16 सितंबर 2009

DIVINE MESSAGE - 16.09.09

Do not be carried away by undue sentiments
and bubbling emotions. Control them.
Reflect how the calamity or trouble or
catastrophe has come. There is always
scope for suitable, effective, easy methods
to tide over the crisis or trying situation.
(Swami Sivananda)
भावनाओं की प्रचुरता और बुलबुले के समान
उठने वाली उत्तेजनाओं के प्रवाह में बह न जाओ।
उनको वश में करो। आखिर संकट आया क्यों, यह
झंझट बरसी कैसे-इस पर मनन करो। परिस्थितियों
पर विजय पाने के लिए अनेकों प्रभावशाली और
आसान तरीकों की सदैव गुंजाईश रहती है।

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मंगलवार, 15 सितंबर 2009

DIVINE MESSAGE - 15.09.09

Always try to keep a cool head. Do not cry
over spilt milk. Anyhow it has come to pass.
You will have to face it with cheerful
countenance. Try to make the best of things.
Find out methods to tide over the difficulty.
(Swami Sivananda)
सदा मस्तिष्क शान्त रखना चाहिए। बहे हुए दूध
पर चिल्लाने से क्या लाभ? घटना घट चुकी है।
हंस हंस कर विफलताओं का प्रतिकार करना
होगा । जो कुछ भी करो अच्छे ढ़ंग से करो ।
कठिनाईयों को उड़ा देने के तरीके खोज निकालो


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सोमवार, 14 सितंबर 2009

DIVINE MESSAGE - 14.09.09

APPLICATION AND TENACITY, INTEREST AND
ATTENTION, PATIENCE AND PERSEVERANCE,
FAITH AND SELF-RELIANCE, CAN MAKE

A MAN A WONDERFUL WORLD-FIGURE.
(Swami Sivananda)
व्यवहार और दृढ़ता, लगन और ध्यान, धैर्य और
अप्रतिहत प्रयत्न, विश्वास और स्वावलम्बन
मनुष्य को ख्यातिमान बना देते हैं।


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शुक्रवार, 11 सितंबर 2009

बंजारानामा - 'नज़ीर' अकबराबादी

टुक हिर्सो-हवा को छोड़ मियां, मत देस-बिदेस फिरे मारा
क़ज़्ज़ाक अजल का लुटे है दिन-रात बजाकर नक़्क़ारा
क्या बधिया, भैंसा, बैल, शुतुर क्या गौनें पल्ला सर भारा
क्या गेहूं, चावल, मोठ, मटर, क्या आग, धुआं और अंगारा
सब ठाठ पड़ा रह जावेगा जब लाद चलेगा बंजारा

गर तू है लक्खी बंजारा और खेप भी तेरी भारी है
ऐ ग़ाफ़िल तुझसे भी चढ़ता इक और बड़ा ब्योपारी है
क्या शक्कर, मिसरी, क़ंद, गरी क्या सांभर मीठा-खारी है
क्या दाख़, मुनक़्क़ा, सोंठ, मिरच क्या केसर, लौंग, सुपारी है
सब ठाठ पड़ा रह जावेगा जब लाद चलेगा बंजारा

तू बधिया लादे बैल भरे जो पूरब पच्छिम जावेगा
या सूद बढ़ाकर लावेगा या टोटा घाटा पावेगा
क़ज़्ज़ाक़ अजल का रस्ते में जब भाला मार गिरावेगा
धन दौलत नाती पोता क्या इक कुनबा काम न आवेगा
सब ठाठ पड़ा रह जावेगा जब लाद चलेगा बंजारा
हिर्सो हवा – लालच; क़ज़्ज़ाक – डाकू; अजल – मौत; शुतुर – ऊंट; क़ंद – खां ड

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